तेरी गेर मोजूदगी में कमजोर होता हुं ।
तेरी मोजूदगी में कुछ और होता हुं ॥
तसव्वुर मे हलकी सी झलक देखी ।
तो परेशां में कुछ और होता हुं ॥
मस्जिद में बूत, मैयखाने में शराबी ।
साकी असल में कुछ और होता हुं ॥
मुहब्बत के हादसे नागवार गुजरे ।
जैसे इश्क में कुछ और होता हुं ॥
सखी फरमान तेरा सर आंखो पर ।
वाइज दुआ में कुछ और होता हुं ॥
१५-१२-२००६
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