आदाब अर्ज़ है
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शनिवार, 4 अगस्त 2012
जिंदगी
शुक्रवार, 29 जून 2012
भारत
रविवार, 18 मार्च 2012
मौसम
आज मौसम एक बडा सैलाब लेके आया है ।
हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा देखो छाया है ॥
जीस्त पे भारी पडा हे एक ही पल का ये कहर ।
साथ अपने आंधी में दुनिया बहा के लाया है ॥
पल दो पल में ओझल हुई शहरो की रोनक कहां ।
सोचते हे हम क्या खोया हे हमने , क्या पाया है ॥
२७-२-२०१२
फूल
पत्थरो में तरासा है प्यार को ।
फूल मुरजा जाते है पल दो पल में ॥
दुनिया को दी है निशानी प्यार की ।
खुश्बु लूटा जाते है पल दो पल में ॥
लोग सदियों से यहां आते है ओर ।
चैनो-सुकु पाते है पल दो पल में ॥
३-३-२०१२
छांव
छांव में धूप को तरसुं ।
बूढा हुं रुप को तरसुं ॥
है मन पर बोझ बड़ा भारी
शिखरों में कूप को तरसुं ॥
कैसा नादां हुं दुनिया में ।
फ़ज़ल के सूप को तरसुं ॥
कृपा
१८-२-२०१२
बुधवार, 12 अक्टूबर 2011
मखमली आवाज
मखमली आवाज गुम क्या हुई ?
गज़ल अनाथ हो गई ॥
दर्द से दामन भर गया ।
दिल का चैन-ओ-सुकु ले गई ॥
होश ही उड गए सुना जग ।
उम्रभर का गम दे गई ॥
चल दिये तो जाना खोया क्या ?
पाने की चाहत अधूरी रह गई ॥
चाहो तो दोलत शौहरत ले लो ।
वो रुह-ए-पाक आवाज लोटा दो ॥
कागज़ की कश्ती बारीश का पानी ।
चंद कहानीयाँ ही रह गई ॥
शाम से आँख मे नमी सी है ।
आपकी कमी हंमेशा रहेगी ॥
फरियाद दिल मे रह जाएगी ।
आँखो से क्या बात हो पाएगी ॥
रविवार, 22 अगस्त 2010
ये हे मोदी का गुजरात ।
ये हे स्वर्णिम गुजरात ॥
ये हे मोदी का गुजरात ।
ये हे स्वर्णिम गुजरात ॥
यहाँ दूध की नदीयाँ बहती ।
खुशी की हरीयाली रहती ।
प्यार की लौ सदा ही जलती ।
ये हे मोदी का गुजरात ।
ये हे स्वर्णिम गुजरात ॥
रीवर फ्रंट में सेर करो तुम ।
काकरीया में लहेर करो तुम ।
बी.आर.टी.एस में शहर घूमो तुम ।
ये हे मोदी का गुजरात ।
ये हे स्वर्णिम गुजरात ॥
यहाँ की बात नीराली ।
यहाँ की रात झगमगाती ।
यहाँ की जात गुजराती ।
ये हे मोदी का गुजरात ।
ये हे स्वर्णिम गुजरात ॥